रुद्रप्रयाग। बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ उनके भीतर आत्मविश्वास जगाने की दिशा में स्नेहा प्रोजेक्ट के तहत राजकीय इंटर कॉलेज दशज्यूला कांडई में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को न केवल उनके कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई, बल्कि किसी भी तरह के शोषण, उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी प्रेरित किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने बालिकाओं को सुरक्षित रहने, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने और भविष्य के प्रति सजग रहने का संदेश दिया।

जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर ने कहा कि बालिकाओं को अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर को लेकर गंभीर एवं जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास और अपने अधिकारों की जानकारी ही बालिकाओं को सशक्त बनाती है। किसी भी समस्या का सामना करने पर चुप रहने के बजाय उसका समाधान तलाशना चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखनी चाहिए। उन्होंने छात्राओं को बिना किसी संकोच के अपनी बात रखने और जीवन में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट ने छात्राओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, साइबर अपराध तथा नंदा गौरा योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। अनजान व्यक्तियों के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें और ऑनलाइन किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर जिम्मेदार लोगों अथवा संबंधित विभाग से सहायता लें। उन्होंने बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की भी अपील की।
स्वास्थ्य विभाग की डॉ. अंजलि मुंबई ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक बदलावों, मासिक धर्म स्वच्छता और पोषण के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस उम्र में संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बेहद आवश्यक है। बालिकाएं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय पर उचित परामर्श लें, ताकि एनीमिया सहित अन्य समस्याओं से बचाव किया जा सके।

बाल कल्याण समिति की सदस्य ममता शैली ने छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों के साथ गुड टच और बैड टच के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी असहज परिस्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित विभागों को जानकारी देकर सहायता लेनी चाहिए।
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति की सदस्य गीता मालासी सहित विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को जागरूक बनाकर उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना तथा उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।
